Tata group bargains for 45 people, in iPhone deal

Tata ग्रुप देगा 45 हजार लोगों को नौकरियां, iPhone पार्ट्स के प्लांट में मिलेंगे मौके

चीन मे कोविड प्रतिबंधों की वजह से उत्पादन पर असर पड़ रहा है जिसे देखते हुए आईफोन भारत में उत्पादन बढ़ा रहा है. इसी वजह से घरेलू कंपनियां भी विस्तार की योजना पर काम कर रही हैं.

टाटा ग्रुप ने एप्पल से ज्यादा से ज्यादा कारोबार हासिल करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टाटा ग्रुप दक्षिण भारत में स्थित अपनी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स का निर्माण करने वाली फैक्टरी में कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने जा रहा है. इस प्लांट में आईफोन के पार्ट्स बनते हैं.

दरअसल भारत सरकार के द्वारा उठाए गए कदमों और चीन में बारबार लग रहे लॉकडाउन की वजह से दुनिया भर की स्मार्टफोन कंपनियां भारत में चीन का विकल्प तलाश रही हैं. वहीं भारतीय कंपनियां चीन का विकल्प बनने की लगातार कोशिश कर रहीं हैं और इस प्रयास में है कि चीन के कारोबार का कुछ हिस्सा भारत लाया जा सके. टाटा ग्रुप की मौजूदा योजना इसी कोशिशों का हिस्सा है.

क्या है टाटा ग्रुप की योजना

टाटा ग्रुप तमिलनाडु के होसुर में स्थित अपने प्लांट में नई प्रोडक्शन लाइन शुरू करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि कंपनी अगले डेढ़ साल से 2 साल के बीच 45 हजार कर्मचारियों की भर्ती करेगी, ये सभी महिला कर्मचारी होंगी. इस प्लांट में आईफोन के लिए केस का निर्माण किया जाता है जिसमें डिवाइस सुरक्षित रहता है.

फिलहाल यहां 10 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं. इनमें से अधिकांश महिला कर्मचारी हैं. फिलहाल भारत में आईफोन के कुल कारोबार का बेहद छोटा हिस्सा है. हालांकि भारत लगातार कोशिश कर रहा वो धीरे धीरे ही सही चीन का विकल्प बन कर उभरे और आईफोन का बड़ा कारोबार हासिल कर सके.

एक और प्लांट लगाने की भी योजना

वहीं टाटा ग्रुप विस्ट्रॉन के साथ एक प्लांट लगाने की भी योजना पर बात कर रहा है. जहां आईफोन को असेंबल किया जा सके. फिलहाल फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन जो आईफोन के लिए पार्ट्स का निर्माण करते हैं, भारत में उत्पादन बढ़ा रहे हैं. दरअसल पश्चिमी देशों में फेस्टिव सीजन की शुरुआत से पहले चीन मे कोविड को लेकर सख्त प्रतिबंधों से आईफोन के उत्पादन पर असर पड़ रहा है इससे निपटने के लिए ये कंपनियां भारत में उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं. इन्हीं संकेतों को देखते हुए भारतीय कंपनियां भी विस्तार पर जोर दे रही हैं.

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